जबलपुर के संजीवनी नगर में एक ही कैंपस में चल रहे स्कूल और शराब दुकान की तस्वीर चौंकाने वाली है। जिस परिसर में बच्चों को पढ़ने और सुरक्षित माहौल में आने-जाने की जगह मिलनी चाहिए, वहीं शराब दुकान के आसपास नशे में धुत लोगों का जमावड़ा लगता है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि दुकान के बाहर गाली-गलौज, हंगामे और वाहनों की भीड़ के बीच विद्यार्थियों को रोजाना स्कूल आना-जाना पड़ता है। कई बार बच्चों का सामना शराब पीने वालों से भी होता है। यह स्थिति तब है, जब स्कूल और शराब दुकान एक ही कैंपस में संचालित हो रहे हैं।
इस मामले में स्थानीय निवासी अजय पटेल ने पुलिस, आबकारी विभाग, शिक्षा विभाग और कलेक्टर तक शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
अदालत ने जबलपुर कलेक्टर को 23 मार्च 2026 को दिए गए आवेदन पर अगली सुनवाई से पहले निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 6 नवंबर को होगी।
सबसे पहले देखिए वह बिल्डिंग जिसमें हैं शराब दुकान और स्कूल…

इसी बिल्डिंग के एक छोर पर स्कूल और शराब दुकान हैं।
दैनिक भास्कर की टीम ने मौके पर पहुंचकर पड़ताल की तो संजीवनी कैंपस में एक हिस्से में शराब दुकान और दूसरे हिस्से में संस्कार भारती स्कूल संचालित होता मिला।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, दुकान के आसपास शराब पीने वालों की भीड़, गंदगी और वाहनों के जमावड़े के कारण बच्चों की आवाजाही प्रभावित होती है।
सवाल यह है कि जिस परिसर में बच्चों का भविष्य गढ़ा जा रहा है, उसी जगह शराब दुकान कैसे संचालित हो रही है और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए?

शराब दुकान के सामने से स्कूल जाते छात्र। कुछ वहीं पर खड़े हुए।
सुबह स्कूल की घंटी, शाम को बोतलों की खनक
संस्कार निकेतन पब्लिक स्कूल सुबह 8 बजे शुरू होता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल आने-जाने वाले बच्चों को शराब दुकान के पास से गुजरना पड़ता है। दोपहर में छुट्टी के समय दुकान के आसपास लोगों का जमावड़ा बढ़ जाता है। कई बार नशे में धुत लोग स्कूल के मुख्य द्वार के पास गाली-गलौज और हंगामा करते हैं।
स्थानीय निवासी अजय पटेल ने बताया कि उन्होंने संजीवनी नगर थाना पुलिस, एसपी, कलेक्टर और आबकारी विभाग से शिकायत की थी। उन्होंने अधिकारियों को वीडियो भी दिखाए, जिनमें बच्चों को शराब दुकान के आसपास से गुजरते देखा जा सकता है। इसके बावजूद दुकान का संचालन जारी रहा।
पटेल के मुताबिक, दुकान के सामने खाने-पीने की चीजें भी बेची जाती हैं, जिससे भीड़ लगती है और कई बार जाम की स्थिति बनती है। उन्होंने स्कूल परिसर से शराब दुकान हटाने की मांग की है।

शराब दुकान के सामने अवैध रूप से संचालित होता आहता।
अभिभावकों और विद्यार्थियों ने जताई चिंता
एक अभिभावक ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर बताया कि वे बच्चों को स्कूल भेजते समय डर महसूस करते हैं। उनके मुताबिक, कई बार शराब पीकर लोग स्कूल के रास्ते में गिर जाते हैं और बच्चियों को असहज माहौल से गुजरना पड़ता है।
एक छात्रा ने बताया कि छुट्टी के समय स्कूल से बाहर निकलने में डर लगता है। उसके मुताबिक, कुछ लोग गंदे कमेंट करते हैं और खाली बोतलें स्कूल परिसर की ओर फेंकते हैं।

याचिकाकर्ता का कहना है कि दुकान के आसपास गंदगी फैली रहती है।
दुकान संचालक और स्कूल कर्मचारी का दावा-सब नियमानुसार
शराब दुकान संचालक रब्बू यादव का कहना है कि उन्हें आसपास स्कूल होने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि दुकान हाल ही में खुली है और इससे पहले यहां किसी अन्य व्यक्ति का ठेका था।
स्कूल में पदस्थ कर्मचारी अंकित का कहना है कि शराब दुकान को लेकर अभिभावकों या बच्चों ने कभी शिकायत नहीं की है और सब कुछ नियमानुसार है।

शराब दुकान के बीच ही स्कूल जाते हैं छात्र-छात्राएं।
हाईकोर्ट में नियमों के उल्लंघन का मुद्दा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने अदालत को बताया कि संजीवनी कैंपस में करीब 20 साल से स्कूल संचालित है। इसी भवन के एक हिस्से को किराए पर शराब दुकान के लिए दिया गया है। उनका कहना है कि दुकान के सामने खुले में शराब पी जाती है और खाली बोतलें वहीं छोड़ दी जाती हैं, जबकि इसी रास्ते से छात्र-छात्राएं गुजरते हैं।

याचिका में कार्रवाई की मांग
याचिका में शराब दुकान को नियमों के विपरीत बताते हुए प्रशासन से कार्रवाई की मांग की गई है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही कलेक्टर को शिकायत पर अगली सुनवाई से पहले निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं।
जबलपुर कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने बताया कि
यदि जांच में दुकान दूरी के मानकों का उल्लंघन करती हुई या स्कूल के साथ एक ही परिसर में संचालित पाई जाती है, तो दुकान को अन्यत्र स्थानांतरित करने की कार्रवाई की जाएगी।

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