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दिवाली पर्व की शुरुआत सबसे पहले भगवान महाकाल के आंगन से हुई। पांच दिवसीय त्योहार के पहले दिन शुक्रवार को महाकालेश्वर मंदिर में परंपरानुसार धनतेरस का पूजन होगा। इससे पहले गुरुवार को संध्या आरती के दौरान गर्भगृह में फूलझड़ी जलाकर दीपावली पर्व की शुरुआत की गई। मान्यता है कि महाकाल मंदिर में सभी त्योहार सबसे पहले मनाने की परंपरा है। इसी के तहत धनतेरस से एक दिन पहले पुजारियों ने भगवान महाकाल के समक्ष फूलझड़ी जलाकर दीपावली मनाई। शुक्रवार को मंदिर के पुरोहित भगवान महाकाल के साथ धन कुबेर और चांदी के सिक्कों का पूजन-अभिषेक करेंगे। इस दौरान भगवान को चांदी का सिक्का भी अर्पित किया जाएगा। दीपावली के अवसर पर भगवान महाकाल की चारों आरतियों-प्रातः भस्म आरती, अभ्यंग स्नान के बाद होने वाली आरती, संध्या आरती और शयन आरती में एक-एक फूलझड़ी जलाई जाएगी। मंदिर समिति के अनुसार, यह प्रक्रिया धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुरूप संपन्न होगी। मंदिर समिति ने जारी की गाइडलाइन मंदिर समिति ने गर्भगृह, कोटितीर्थ कुंड, मंदिर परिसर और श्री महाकाल महालोक क्षेत्र में आतिशबाजी और पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है। इन क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थ, अनार, फूलझड़ी या अन्य आतिशबाजी सामग्री लाने और उनका इस्तेमाल करने की भी अनुमति नहीं होगी।
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बाबा महाकाल के आंगन में सबसे पहले दीपावली:संध्या आरती में गर्भगृह में फूलझड़ी जलाकर की शुरुआत, पटाखों और आतिशबाजी पर रोक
