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MP Urban Body Procurement Scam


भोपाल2 मिनट पहले

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मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में सरकारी खरीदी के दौरान कीमतों में भारी अंतर सामने आने के मामले में सरकार ने उच्चस्तरीय जांच कराने की बात कही है।

नगरीय प्रशासन राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि विभाग के कामकाज की निगरानी होती है। खरीदी या निर्माण कार्य में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाती है।

एसीएस संजय दुबे के वायरल वीडियो के जरिए जो जानकारी सामने आई है, उसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। जो भी व्यक्ति इसमें संलिप्त होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

मंत्री ने यह भी कहा कि GeM पोर्टल पर खरीदी में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी। किसी उत्पाद की कीमत में इतना अंतर क्यों है, इसकी पड़ताल होगी। यह भी देखा जाएगा कि पोर्टल की प्रक्रिया में मौजूद कमियों का फायदा कैसे उठाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीदी में गड़बड़ी मिलने पर सभी जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री बोलीं- कीमतों में अंतर की वजह भी पता करेंगे

वायरल वीडियो को लेकर सवाल पूछे जाने पर प्रतिमा बागरी ने कहा कि विभाग में खरीदी और निर्माण सहित सभी कामों की निगरानी होती है।

गड़बड़ी मिलने पर विभाग जांच करता है और कार्रवाई भी करता है। उन्होंने कहा कि पहले भी ऐसे मामलों में कठोर कार्रवाई की गई है और जरूरत पड़ने पर उसकी सूची उपलब्ध कराई जा सकती है।

मंत्री ने कहा, “अभी जो वीडियो वायरल हुआ है, उसके माध्यम से जानकारी मिली है। हम इसकी उच्चस्तरीय जांच कराएंगे और उचित कार्रवाई करेंगे। जो भी व्यक्ति संलिप्त होगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।” जब उनसे पूछा गया कि खरीदी में शामिल सभी लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं, तो उन्होंने कहा कि सभी पर कार्रवाई की जाएगी।

200 LED बल्ब ₹60 लाख में खरीदे

नगरीय प्रशासन विभाग के एसीएस संजय दुबे का वायरल वीडियो भोपाल के भौंरी स्थित सुंदरलाल पटवा शहरी विकास प्रशिक्षण संस्थान में हुई विभागीय बैठक का बताया जा रहा है। बैठक में नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे, मुख्य नगर पालिका अधिकारी, संचालक और विभाग के अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद थे।

वीडियो में संजय दुबे ने नगरीय निकायों की खरीदी में कीमतों के अंतर पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग को पता है कि किस निकाय ने क्या खरीदा और किस दर पर खरीदा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस साल से गड़बड़ियों पर कार्रवाई होगी।

करीब तीन मिनट बाद MPSEDC के एडिशनल एमडी अंशुमन राज ने GeM पोर्टल से हुई खरीदी का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि 2023 में एक नगर पालिका में 200 LED बल्ब ₹60 लाख में खरीदने की शिकायत से यह विश्लेषण शुरू हुआ था। इसके बाद प्रदेश के नगरीय निकायों की खरीदी का डेटा जुटाया गया।

प्रस्तुति के मुताबिक, पिछले तीन साल में 374 नगरीय निकायों ने GeM पोर्टल से करीब ₹1,134 करोड़ की खरीदी की। अंशुमन राज ने दावा किया कि यदि खरीदी औसत दर पर होती तो करीब ₹250 करोड़ बचाए जा सकते थे।

एक डंपर ₹2 लाख का, दूसरे निकाय ने ₹6 लाख में खरीदा

संजय दुबे ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक निकाय ने कचरा वाहन ₹2 लाख में खरीदा, जबकि दूसरे ने चार डस्टबिन के साथ इसी तरह का वाहन ₹6 लाख में खरीदा। उन्होंने आशंका जताई कि अतिरिक्त सामान जोड़कर कीमत बढ़ाई गई और अपने लोगों के जरिए खरीद कराई गई।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीदे, जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड नहीं हैं। उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि खरीदी की जानकारी विभाग के पास है और अब ऐसी गड़बड़ियां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।

एक लीटर डिसइन्फेक्टेंट ₹5 से ₹33,500 तक

अंशुमन राज ने प्रस्तुति में बताया कि एक लीटर फिनॉलिक डिसइन्फेक्टेंट की कीमत एक जगह ₹5 और दूसरी जगह ₹33,500 दर्ज हुई। उनके मुताबिक, सरदारपुर निकाय ने 2,500 लीटर की खरीदी ₹1.35 लाख में की, जबकि राजगढ़ क्षेत्र के एक निकाय में इसी तरह के उत्पाद की कीमत ₹33,500 बताई गई।

इसी तरह 60 वाट की LED लाइट एक जगह ₹306 और भोपाल में ₹11,800 में खरीदे जाने का उदाहरण दिया गया। भोपाल की इस खरीदी का कुल मूल्य ₹3.78 लाख बताया गया।

प्रस्तुति के मुताबिक, तीन साल में नगरीय निकायों ने करीब ₹65 करोड़ के गारबेज टिपर और डंपर, ₹49 करोड़ की स्ट्रीट लाइट, ₹27 करोड़ के ऑक्टागोनल पोल और ₹18 करोड़ के डिसइन्फेक्टेंट खरीदे। जबलपुर संभाग की खरीदी करीब ₹202 करोड़ बताई गई।

एक विक्रेता के 201 अनुबंध, 21 नगरपालिकाओं में आपूर्ति

अंशुमन राज ने लेबर इंडस्ट्री नाम के विक्रेता का उदाहरण देते हुए बताया कि उसके 21 नगरपालिकाओं में करीब 201 अनुबंध थे। प्रस्तुति में इसी नाम से ₹38 करोड़ और ₹12 करोड़ की आपूर्ति के आंकड़ों का उल्लेख हुआ। बड़ोदिया कलां में करीब ₹11 करोड़ की आपूर्ति का भी जिक्र किया गया।

विभाग के विश्लेषण का उद्देश्य यह पता लगाना है कि विक्रेता किन निकायों में काम कर रहे हैं, कितनी राशि के अनुबंध कर रहे हैं और वास्तव में कौन-सा सामान बेच रहे हैं। हालांकि, कीमतों में अंतर या किसी विक्रेता के कई निकायों में अनुबंध होने से अपने आप भ्रष्टाचार साबित नहीं होता। इसके लिए खरीद प्रक्रिया और भुगतान के रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।

2,500 लोगों के पासवर्ड लीक होने का दावा

बैठक में साइबर सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई। नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने बताया कि अंशुमन राज ने नगरीय निकायों के करीब 2,500 लोगों के ईमेल, यूजर आईडी और पासवर्ड लीक होने की जानकारी साझा की थी। उन्होंने अधिकारियों को पासवर्ड और OTP साझा करने के जोखिमों के प्रति आगाह किया।

इसके बाद अंशुमन राज ने बताया कि डार्क वेब पर मिले डेटा के विश्लेषण में ये क्रेडेंशियल सामने आए। उन्होंने आशंका जताई कि कुछ कंप्यूटरों में जानकारी चुराने वाले मैलवेयर मौजूद हैं। प्रभावित सिस्टम की जांच, मैलवेयर हटाने और संदिग्ध वेबसाइटों, टोरेंट तथा फिशिंग ईमेल से बचने की सलाह दी गई।

उज्जैन संभाग के पत्र में GeM से खरीदी के निर्देश

इस पूरे मामले के बीच उज्जैन संभाग के संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास राजीव निगम का 24 अप्रैल 2026 का पत्र भी चर्चा में है।

पत्र क्रमांक 2026/2191 में सभी नगर पालिका और नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को शासन के निर्देशों के विपरीत GeM पोर्टल का इस्तेमाल किए बिना खरीदी के लिए निविदाएं जारी नहीं करने की हिदायत दी गई है।

पत्र में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत में कुछ निकाय विद्युत प्रकाश सामग्री, मोटर पंप मरम्मत, निर्माण सामग्री, स्वच्छता सामग्री और पेयजल संबंधी कार्यों के लिए ₹1 लाख से अधिक और ₹20 से ₹30 लाख तक की निविदाएं जारी कर रहे हैं। पत्र के मुताबिक, शासन ने सामग्री GeM पोर्टल के माध्यम से खरीदने के निर्देश दिए हैं। इसके विपरीत निविदाएं जारी कर खरीदी करना नियमों के विरुद्ध है।

संयुक्त संचालक ने ऐसी निविदाओं को तत्काल निरस्त करने की सलाह दी और अन्यथा संबंधित मुख्य नगर पालिका अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी दी।

एक ओर एसीएस संजय दुबे के वीडियो में GeM के जरिए हुई खरीदी में कीमतों के अंतर और संभावित अनियमितताओं की बात सामने आई है, वहीं उज्जैन संभाग के पत्र में शासन के निर्देशों के अनुसार इसी पोर्टल के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।

अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि किन खरीदी में वास्तव में अनियमितता हुई, कीमतों में अंतर की वजह क्या थी और क्या किसी ने प्रक्रिया की कमियों का फायदा उठाया।

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MP के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार का VIDEO

एक निकाय ने ₹2 लाख में कचरा वाहन खरीदा, तो दूसरे ने चार डस्टबिन के साथ इसी तरह के वाहन के लिए ₹6 लाख खर्च कर दिए। यानी अतिरिक्त सामान के नाम पर कीमत तीन गुना हो गई। कुछ निकायों ने डेढ़-डेढ़ करोड़ रुपए तक के कचरा वाहन खरीद डाले, जबकि उनके पास इतने वाहन चलाने के लिए पर्याप्त वार्ड तक नहीं हैं। आखिर सरकारी खरीदी के नाम पर यह सब क्या हो रहा है?पूरी खबर पढ़ें



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