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हरदा में नाली किनारे मिली नवजात का नाम रखा ‘आध्या’:मां ने अपनाने से किया था इनकार; अस्पताल की सिस्टर कर रहीं मां जैसी देखभाल




हरदा में 11 दिन पहले नाली किनारे मिली नवजात अब अस्पताल में सबकी लाडली बन गई है। उसे जन्म देने वाली मां ने अपनाने से इनकार कर दिया था। लेकिन अस्पताल की सिस्टरों ने उसे अकेला महसूस नहीं होने दिया। वे उसे मां की तरह दुलार कर रही हैं। उसकी देखभाल में दिन-रात जुटी हैं। डॉक्टरों और सिस्टरों ने मिलकर उसका नाम आध्या रखा है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसका वजन भी बढ़ रहा है। 20 दिन पूरे होने पर उसे शिशुगृह भेजा जाएगा। बता दें कि 22 अक्टूबर की शाम जिला अस्पताल के पास एक नवजात बच्ची मिली थी। वह अस्पताल से कुछ ही दूरी पर एक नाली के किनारे पड़ी थी। पास में दो बाइक खड़ी थीं। उन्हीं की आड़ में उसे छोड़ा गया था। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों का ध्यान गया। उन्होंने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस बच्ची को जिला अस्पताल लेकर पहुंची। जांच में सामने आया था कि बच्ची का जन्म उसी दिन जिला अस्पताल में हुआ था। उसे जन्म देने वाली युवती और उसकी मां उसे वहां छोड़कर गई थीं। पुलिस ने दोनों को तलाश लिया था। पूछताछ में युवती ने बताया था कि उसकी सगाई हो चुकी है। उसे डर था कि बच्ची के जन्म की बात सामने आने पर सगाई टूट सकती है। मां ने अपनाने से किया इनकार
बच्ची की मां ने पुलिस और बाल कल्याण समिति के सामने साफ कह दिया कि वह उसका पालन-पोषण नहीं कर सकती। उसने बच्ची को अपनाने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी बाल कल्याण समिति के पास आ गई। दूसरी ओर, बच्ची को गोद लेने के लिए कई परिवार आगे आए। कुछ लोगों ने पुलिस और मीडिया से संपर्क कर कानूनी प्रक्रिया की जानकारी भी मांगी। इनमें एक शिक्षक भी हैं। उनके घर में शादी के 19 साल बाद भी बच्चे की किलकारी नहीं गूंजी है। वे बच्ची को बेटी बनाकर घर लाना चाहते हैं। हालांकि, बच्ची किस परिवार को मिलेगी, इसका फैसला कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। सिस्टरों ने दिया मां जैसा दुलार
अस्पताल में बच्ची की देखभाल कर रही सिस्टरें उसे अपने परिवार का हिस्सा मानने लगी हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सनी जुनेजा ने बताया कि एसएनसीयू की सभी सिस्टरें उसकी दिन-रात देखभाल करती हैं। उसे समय पर दूध पिलाया जा रहा है। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसका वजन भी बढ़ा है। एसएनसीयू की सिस्टर यशोदा ने बताया कि सभी सिस्टरें बच्ची को मां जैसा प्यार देती हैं। वे उसे अपनेपन का अहसास कराने की कोशिश करती हैं। ड्यूटी खत्म होने के बाद घर लौटने पर भी उसकी चिंता बनी रहती है। बार-बार उसका ख्याल आता है। नवरात्रि के बाद मिली, इसलिए रखा नाम आध्या
डॉ. सनी जुनेजा ने बताया कि बच्ची नवरात्रि के तुरंत बाद मिली थी। इसी वजह से उसका नाम देवी दुर्गा के नाम पर आध्या रखा गया। अस्पताल के डॉक्टरों और सिस्टरों को उम्मीद है कि वह आगे भी स्वस्थ रहेगी और उसे एक अच्छा परिवार मिलेगा। 20 दिन बाद शिशुगृह भेजी जाएगी बच्ची
बाल कल्याण समिति की सदस्य शिखा केशवरे ने बताया कि बच्ची के स्वास्थ्य और देखभाल पर लगातार नजर रखी जा रही है। समिति जिला चिकित्सा अधिकारी के संपर्क में है। बच्ची को नियमित पोषण दिया जा रहा है। उसकी सेहत संतोषजनक है। उन्होंने बताया कि चिकित्सकीय देखरेख और जरूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 20 दिन की अवधि पूरी होने पर बच्ची को नियमानुसार शिशुगृह भेजा जाएगा।



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