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चीते के डर से न खेत जा रहे,न बच्चे स्कूल:श्योपुर के किसान बोले- हम रात में भी सो नहीं पाते; मुआवजा भी नहीं मिलता




श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की संख्या बढ़ने के साथ उनका मूवमेंट जंगल की सीमाओं से बाहर खेतों और गांवों तक पहुंच रहा है। इसके चलते मानव-चीता संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। बीती 25 अक्टूबर को मुरैना के बमोरी गांव में दो चीते गांव के बाहर बने एक मकान में घुस गए। यहां आंगन में बंधे दो बछड़ों का शिकार कर लिया। इसी दिन कूनो नेशनल पार्क से निकलकर मुरैना पहुंचे 19 महीने के मादा चीते KNG22 को गोली मार दी गई। देश में इस तरह का ये पहला मामला है। प्राथमिक जांच के बाद वन विभाग के 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। दैनिक भास्कर टीम चीतों के मूवमेंट वाले गांवों- कुडार, बमोरी और परतवाड़ा में पहुंची और ग्रामीणों से हालात जाने। उनका कहना है कि अब वे अपने मवेशियों को जंगल की तरफ भेजने के बजाय घरों के आसपास ही चरा रहे हैं। रात के समय जागकर पहरा दे रहे हैं। यह समय खेतों में सिंचाई करने का है, लेकिन चीतों की मौजूदगी के कारण खेतों तक जाने में भी डर लग रहा है। घर में घुसकर बछड़ों का शिकार किया था 25 अक्टूबर की सुबह करीब 5 बजे दो चीते श्योपुर के बमोरी गांव की एक टपरी में घुसे। उन्होंने सोमलावीर सिंह के घर में पले दो बछड़ों का शिकार कर लिया। घटना के वक्त सोमला, पत्नी कालूबाई के साथ उसी टपरी में खटिया डालकर सो रहे थे। बछड़े भी वहीं बंधे थे। चीतों को सामने देखकर पति-पत्नी घबरा गए। दूर भागकर अपनी जान बचाई। अफसरों ने कहा- जानवर चराने दूर मत जाना इस घटना के बाद कूनो नेशनल पार्क के आसपास बसे गांवों में दहशत पसरी है। भास्कर की टीम कुडार गांव पहुंची, जहां विकास पटेरिया जानवर चराते मिले। उन्होंने कहा- गांव में डर का माहौल है। हम बकरियों को चराने ज्यादा दूर नहीं जाते। जानवर घर के बाहर ही बंधे रहते हैं इसलिए रात को भी जागना पड़ता है। विकास ने कहा- वन विभाग की टीम आई थी। अफसरों ने कहा है कि जानवर चराने जंगल में ज्यादा दूर तक मत जाना। चार घंटे तक कमरे में ही दुबके बैठे रहे कुडार गांव के बाद भास्कर टीम बमोरी पहुंची। इसी गांव में चीतों ने बछड़ों का शिकार किया था। घटना के प्रत्यक्षदर्शी जनम पटेरिया ने बताया कि हम जानवरों को घर के अंदर बांधकर ही रख रहे हैं। चराने नहीं ले जाते। बच्चों को भी दिनभर घर में ही रखते हैं। स्कूल नहीं भेज रहे। डर लग रहा है कि चीता फिर न आ जाए। बमोरी गांव में ही सोमलावीर सिंह की पत्नी कालूबाई मिलीं। इनके दो बछड़ों का शिकार चीतों ने किया था। कालू ने भास्कर से कहा- हम टापरी में ही सो रहे थे। दोनों झेंगरा (बछड़े) यहीं बांध रखे थे। गाय उधर बंधी थी। चीतों ने हमला किया और दोनों एक-एक झेंगरे को खा गए। हम चार घंटे तक कमरे में ही दुबके रहे। मुरैना में शावक को गोली मारी 5 अक्टूबर को इस घटना के बाद ही मादा चीते निर्वा के 19 महीने के शावक के घायल होने की खबर सामने आई। यह शावक मुरैना जिले के पहाड़गढ़ क्षेत्र में मिला। प्राथमिक जानकारी सामने आई थी कि ग्रामीणों ने चीते को लाठी-डंडों से पीटकर घायल कर दिया था। घायल शावक को इलाज के लिए जबलपुर के वेटरनरी अस्पताल लाया गया था। यहां वाइल्ड लाइफ स्कूल ऑफ फॉरेंसिक सेल में सर्जन डॉ. शोभा जावरे ने उसका ऑपरेशन किया। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया कि चीते के शरीर में गोली लगी थी। ऑपरेशन के दौरान उसके शरीर से छर्रे निकाले गए थे। जांच के लिए फॉरेस्ट और पुलिस अधिकारियों का स्पेशल टास्क फोर्स बनाया गया है। विजयपुर के वन परिक्षेत्र अधिकारी जाहर सिंह गौड़, मुरैना के पहाड़गढ़-कैलारस रेंजर आकाश तोमर, कन्हार चौकी प्रभारी डिप्टी रेंजर कीर्ति शांडिल्य और नाकेदार दिनेश मरैया को सस्पेंड कर दिया गया है। एसटीएफ ने तीन संदेहियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। एक चीते की निगरानी 4 कर्मचारी कर रहे नाम न बताने की शर्त पर एक वन अधिकारी ने कहा- खुले जंगल में घूम रहे चीतों की निगरानी और सुरक्षा के लिए हमारी टीमें लगातार ट्रैकिंग करती हैं। हर चीते की निगरानी में चार कर्मचारियों की टीम रहती है, जो उससे करीब 100 मीटर की दूरी बनाए रखती है। ट्रैकिंग के लिए रेडियो कॉलर और उसके सिग्नल प्राप्त करने वाले डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है। जब चीता नजर नहीं आता तो कर्मचारी रेडियो कॉलर के सिग्नल सिस्टम से उसकी लोकेशन का पता लगाते हैं।



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