पेंच टाइगर रिजर्व के दुरिया गेट के लिए नया रास्ता:पचधार से मार्ग बनने पर 2 किमी दूरी कम होगी, वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे




सिवनी जिले के पेंच टाइगर रिजर्व के दुरिया गेट तक पहुंचने के लिए पर्यटकों को जल्द ही एक वैकल्पिक मार्ग मिल सकता है। वन्यजीवों की सुरक्षा और आसपास के गांवों के विकास को ध्यान में रखते हुए पार्क प्रबंधन ने पचधार से दुरिया गेट तक पक्का मार्ग बनाने की मांग प्रशासन के समक्ष रखी है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। नई सड़क बनने और पर्यटकों की आवाजाही शुरू होने से वर्तमान मार्ग की तुलना में करीब दो किलोमीटर की दूरी कम हो सकती है। वर्तमान में नागपुर की ओर से आते हैं पर्यटक वर्तमान में नागपुर सहित महाराष्ट्र की ओर से आने वाले पर्यटक खवासा होकर टुरिया गेट तक पहुंचते हैं। खवासा से पचधार की दूरी लगभग चार किलोमीटर है। प्रस्तावित मार्ग से नागपुर की ओर से आने वाले पर्यटकों को हाईवे पर कुछ आगे बढ़कर पचधार से प्रवेश का विकल्प मिल सकता है। वहीं, जबलपुर की ओर से आने वाले पर्यटकों को खवासा तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खवासा से दुरिया गेट की दूरी करीब 12 किलोमीटर बताई जाती है। वन्यजीवों की सुरक्षा पर विशेष जोर खवासा से दुरिया गेट तक का मार्ग पक्का है और इस क्षेत्र में पर्यटकों के वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है। यह इलाका पेंच टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्र में आता है, जहां बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों का विचरण होता है। पूर्व में वाहनों की आवाजाही के दौरान वन्यजीवों की मौत की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। बाघिन जुगनी को भी अपने शावकों के साथ जंगल के किनारे विचरण करते देखा जाता रहा है। ऐसे में वैकल्पिक मार्ग विकसित होने से संवेदनशील हिस्से में यातायात का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है। माटीकला को मिलेगा बढ़ावा पचधार से दुरिया गेट तक मार्ग बनने का लाभ स्थानीय ग्रामीणों और माटीकला से जुड़े कारीगरों को भी मिल सकता है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने पर मिट्टी से बने उत्पादों की बिक्री, स्थानीय दुकानों और अन्य छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। पर्यटकों के ठहरने और स्थानीय उत्पादों को प्रदर्शित करने की सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बन सकते हैं। वन्यप्राणियों की सुरक्षा और ग्राम विकास पर फोकस पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर देवा प्रसाद जे के अनुसार, वन्यप्राणियों की सुरक्षा और ग्राम विकास को ध्यान में रखते हुए पचधार से दुरिया गेट तक पक्का मार्ग बनाने की मांग की गई है। इस पहल से पर्यटन और स्थानीय विकास, दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है। हालांकि, मार्ग के निर्माण, लागत और पर्यटकों के लिए इसे खोलने संबंधी निर्णय प्रशासनिक स्वीकृति के बाद ही स्पष्ट होंगे।



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