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ग्वालियर शहर की जर्जर और जानलेवा सड़कों पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। अदालत के सामने एनएचएआई (NHAI) और नगर निगम ग्वालियर ने अपनी-अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश की। एनएचएआई की नेटवर्क सर्वे व्हीकल (NSV) रिपोर्ट ने जहाँ सड़कों के घटिया निर्माण और बदहाली की पोल खोलकर रख दी, वहीं नगर निगम ने केवल पैचवर्क का ब्योरा देकर कागजी खानापूर्ति करने की कोशिश की। हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद NHAI को अपने ठेकेदार की ₹26.53 करोड़ की एन्युइटी राशि रोकनी पड़ी है। एनएचएआई ने यह पूरी रकम केनरा बैंक में 3 महीने के लिए FDR करा दी है। साफ शर्त रखी गई है कि जब तक ग्वालियर बायपास सड़क मानकों पर खरी नहीं उतरती, तब तक कंपनी को एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया जाएगा। NSV रिपोर्ट का सच: 36 KM में गड्ढे और धंसाव ‘पुअर’ कैटेगरी में हाईकोर्ट में पेश एनएचएआई की लेटेस्ट (मई 2026) सर्वे रिपोर्ट ने सड़क की खस्ताहाली उजागर कर दी है। 36 KM से ज्यादा हिस्से में खतरनाक रफनेस: अनुबंध के अनुसार प्रति किमी रफनेस 2500 मिमी से कम होनी चाहिए, लेकिन 36 किमी से ज्यादा हिस्से में यह सीमा पार हो चुकी है। इससे गाड़ियों को जानलेवा झटके लग रहे हैं। 11 KM में गड्ढे: 11.100 लेन किलोमीटर में गाड़ियों के पहियों के दबाव से 10 मिमी से अधिक गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिन्हें रिपोर्ट में आधिकारिक तौर पर ‘खराब’ श्रेणी में डाला गया है। 38.4 KM में मध्यम खराबी: 38.400 किलोमीटर में रटिंग 5 से 10 मिमी दर्ज की गई है। याची की ओर से यह रखा गया पक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट में दलील दी कि पुरानी रिपोर्टों से ही ग्वालियर बायपास की गुणवत्ता लगातार घटिया साबित हो रही है, लेकिन मरम्मत केवल कागजों और आंशिक सुधारों तक सीमित रही। इसलिए यह सुधार काफी नहीं है। सड़कों का ‘सर्वे रिपोर्ट कार्ड’: साल-दर-साल बिगड़ते गए हालात · नवंबर 2023 सर्वे: 9.00 लेन किमी हिस्सा तय रफनेस सीमा से बाहर था और डिप्रेशन (धंसाव) ‘खराब’ श्रेणी में था। · मई 2024 सर्वे: रफनेस 7.80 लेन किमी दर्ज हुई और राइड क्वालिटी को ‘औसत’ बताया गया। · मई 2026 सर्वे: स्थिति बेहद विकराल हो गई; 36 किमी से अधिक हिस्से में अत्यधिक रफनेस और 11 किमी में गंभीर गड्ढों की पुष्टि हुई, जिससे तत्काल पुनर्निर्माण/मरम्मत की जरूरत उजागर हुई है। नगर निगम का दावा: 35 दिन में 461 जगह भरा पैचवर्क, कोर्ट में सौंपी तस्वीरें दूसरी ओर शहर की सड़कों को लेकर नगर निगम ने अपनी सफाई में पेंचवर्क की रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखी। निगम ने दावा किया कि 7 सितंबर 2026 से 12 अक्टूबर 2026 के बीच 35 दिनों के भीतर शहर में 461 जगहों पर गड्ढे भरे गए हैं। चेतकपुरी, शारदा विहार, श्रीराम कॉलोनी, बसंत विहार, फूलबाग, विवेक विहार, चना कोठार, नया पायगा गूड़ी और जवाहर मार्ग जैसे प्रमुख इलाकों में नाइट व डे शिफ्ट में पैचवर्क किया गया। नगर निगम ने अपने दावों को साबित करने के लिए गड्ढों के नाप-जोख, क्षेत्रफल और ‘काम से पहले व बाद’ की जीपीएस टैग तस्वीरों का पूरा रिकॉर्ड कोर्ट में जमा किया है।
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हाईकोर्ट में सड़कों को लेकर हुई सुनवाई:NSV की पुरानी रिपोर्ट से खुलासा-36 KM में दर्द भरे झटके, गड्ढे और धंसाव 'खराब' श्रेणी में सड़क
