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जबलपुर में साइबर ठगी के तीन मामले सामने आए हैं। डेयरी संचालक के बैंक खाते से 1 लाख 43 हजार 997 रुपए निकाल लिए गए। वहीं, एक रिटायर्ड कर्मचारी को ब्लिंकिट कस्टमर केयर नंबर के जरिए ठगी का शिकार बनाया गया। तीसरे मामले में मरीज के दोस्त ने नागपुर के लिवर स्पेशलिस्ट डॉक्टर का नंबर गूगल पर सर्च कर संपर्क किया, जिसके बाद उसे व्हाट्सएप पर APK फाइल भेजी गई। इन मामलों में एक व्यक्ति के खाते से 83 हजार और दूसरे के खाते से 1 लाख रुपए निकाले गए। डेयरी संचालक के अकाउंट से निकले रुपए कैंट थाने में मोतीबाग कैंट निवासी 20 वर्षीय मोहम्मद अली घोसी ने शिकायत दर्ज कराई है। वह अपने पिता के साथ परियट में डेयरी चलाते हैं। उन्होंने बताया कि पंजाब नेशनल बैंक की सदर शाखा में उनके करंट अकाउंट से बिना अनुमति रुपए निकाले गए। मोहम्मद अली के मुताबिक, 30 अक्टूबर को सुबह 9:22 बजे 80 हजार और 9:25 बजे 5 हजार रुपए कटने के मैसेज उन्हें 31 अक्टूबर को मिले। उसी दिन खाते में 90 हजार और 80 हजार रुपए जमा हुए। इसके बाद अलग-अलग ट्रांजेक्शन में 4,999, 1,999, 4,999, 5,000, 19,999, 5,000, 2,000, 2,999, 1,999, 1,999 और 1,999 रुपए निकाले गए। इसी दिन उनके सेविंग अकाउंट से 999-999 रुपए के छह ट्रांजेक्शन भी हुए। कुल 1 लाख 43 हजार 997 रुपए की ठगी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। बैंक की जानकारी और ट्रांजेक्शन हिस्ट्री के आधार पर आरोपी की तलाश की जा रही है। ब्लिंकिट के नाम पर कस्टमर केयर से ठगी मदनमहल थाने में स्नेहनगर निवासी 69 वर्षीय अशोक कुमार नामदेव ने शिकायत की है। वह ऑर्डनेंस फैक्ट्री से रिटायर हैं। उन्होंने बताया कि 18 अक्टूबर को ब्लिंकिट से सामान मंगवाया था और बिल से ज्यादा रुपए लिए गए थे। शिकायत करने के लिए उन्होंने गूगल पर ब्लिंकिट कस्टमर केयर का नंबर खोजा और उस पर फोन किया। फोन उठाने वाले व्यक्ति ने उन्हें अपना व्हाट्सएप नंबर दिया और कॉल करने को कहा। इसके बाद उसने मोबाइल की सेटिंग में जाकर ‘एमाउंट’ विकल्प के ‘इन्फो एंड शेयर’ में जानकारी देने को कहा। अशोक कुमार उस व्यक्ति के बताए अनुसार जानकारी देते गए। बाद में मैसेज चेक किया तो कोई रकम वापस नहीं आई थी। इसके बाद उन्होंने गूगल पे में चेक किया तो उनके खाते से 83 हजार रुपए निकल चुके थे। जांच करने पर पता चला कि रकम शकील अहमद नाम के खाते में ट्रांसफर हुई है। अपॉइंटमेंट बुकिंग के नाम पर भेजी APK फाइल सहजपुर निवासी 42 वर्षीय राजेश कुमार पटेल ने शिकायत दर्ज कराई कि वह अपने बीमार पड़ोसी को देखने निजी अस्पताल गए थे। वहां पता चला कि नागपुर के मिडास अस्पताल में लिवर स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं। इलाज के लिए उन्होंने गूगल पर डॉक्टर का नंबर सर्च कर संपर्क किया। संपर्क करने पर व्हाट्सएप पर रिपोर्ट भेजने को कहा गया। 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे ‘हाय’ मैसेज के साथ अपॉइंटमेंट बुकिंग के नाम पर एक APK फाइल भेजी गई। राजेश ने फाइल पर क्लिक कर मरीज की जानकारी भर दी। इसके बाद 5 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस का विकल्प आया। मना करने पर आरोपी ने कहा कि सिर्फ 5 रुपए ही हैं। राजेश ने 5 रुपए ट्रांसफर कर दिए। रात 8 बजे इसका मैसेज भी आया। कुछ दिन बाद 5 तारीख की रात उनके मोबाइल पर तीन बार में 1 लाख रुपए कटने के मैसेज आए। बैलेंस चेक करने पर राशि गायब थी, जबकि किसी पेमेंट ऐप में हिस्ट्री नहीं दिखी।
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डेयरी संचालक के खाते से 1.43 लाख रुपए निकले:जबलपुर में साइबर ठगी के तीन मामले; रिटायर्ड कर्मचारी और मरीज का दोस्त भी बने शिकार
