27% OBC आरक्षण पर CM हाउस में बैठक:ओबीसी महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने कहा- 13% होल्ड वाले केंडिडेट्स को जल्दी राहत दी जाए




मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद ओबीसी महासभा ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। महासभा के कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों के लिए पद बढ़ाकर भर्ती करने का प्रयास करने का आश्वासन दिया है। महासभा दो-तीन दिन इंतजार करेगी। इसके बाद भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन तेज किया जाएगा। शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक के बाद महासभा के पदाधिकारी ने कहा कि जबलपुर हाईकोर्ट के अंतरिम फैसले के बाद संगठन ने 15 अक्टूबर को प्रदेशभर में ज्ञापन और प्रदर्शन किए थे। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि बैठक में मुख्यमंत्री की ओर से कुछ बातों को गोल-गोल तरीके से रखने का प्रयास महसूस हुआ। 20 साल से सरकार, फिर नया कानून क्यों नहीं बनाया महासभा के कोर कमेटी सदस्य ने कहा कि बैठक में मुख्यमंत्री से सवाल किया गया कि यदि कांग्रेस सरकार के समय लाया गया कानून सही नहीं था, तो पिछले 20 साल से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार ने नया कानून क्यों नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि अब भी सरकार नया कानून क्यों नहीं ला सकती। महासभा ने 27% आरक्षण की बहाली के लिए ठोस और प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। 13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों के पद बढ़ाकर भरने का आश्वासन पदाधिकारी के मुताबिक बैठक में महासभा ने स्पष्ट कहा कि 13% होल्ड में रखे गए अभ्यर्थियों को किसी भी स्थिति में भर्ती का अवसर दिया जाए। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार कोर्ट जा रही है और कानूनी प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। साथ ही, 13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों के लिए पद बढ़ाकर भर्ती करने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सरकार की एक कमेटी काम कर रही है। महासभा ने इस आश्वासन के बावजूद आंदोलन स्थगित करने का ऐलान नहीं किया है। पदाधिकारी ने कहा कि संगठन दो-तीन दिन इंतजार करेगा। यदि प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 28 अक्टूबर को संभागीय स्तर पर ज्ञापन दिया जाएगा। इसके बाद मध्यप्रदेश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। मुख्यमंत्री को 14 सूत्रीय मांगपत्र, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी पर जोर बैठक में महासभा ने मुख्यमंत्री को 27% ओबीसी आरक्षण की बहाली के लिए 14 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। इसमें हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं, संविधान विशेषज्ञों और आरक्षण के जानकारों का पैनल गठित करने की मांग की गई है। महासभा चाहती है कि मामले में तथ्यात्मक और कानूनी आधारों के साथ प्रभावी पैरवी की जाए। मांगपत्र में 50% आरक्षण सीमा और असाधारण परिस्थितियों से जुड़े कानूनी प्रावधानों का विस्तृत अध्ययन कराने की मांग भी शामिल है। इसके लिए इंद्रा साहनी और लक्ष्मणराव पाटिल से जुड़े फैसलों के संदर्भ में मध्यप्रदेश की सामाजिक, ऐतिहासिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों का स्वतंत्र अध्ययन कराने को कहा गया है। नए सामाजिक-आर्थिक सर्वे और बंसल आयोग रिपोर्ट की समीक्षा की मांग महासभा ने ओबीसी वर्ग की वर्तमान सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का व्यापक सर्वे कराने की मांग की है। इसमें सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में भागीदारी, रोजगार और ग्रामीण-शहरी असमानताओं का आकलन शामिल है। संगठन ने वर्ष 2023 की बंसल आयोग रिपोर्ट का स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से पुनर्मूल्यांकन कराने और आंकड़ों की पर्याप्तता की जांच करने की मांग भी रखी है। मांगपत्र में ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधित्व का आकलन केवल जनसंख्या या कुछ पदों के आंकड़ों के आधार पर नहीं, बल्कि विभागवार, संवर्गवार और पद-स्तर पर करने का सुझाव दिया गया है। महासभा ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप परामर्श लेने की मांग भी की है। भर्ती में देरी रोकने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने की मांग महासभा ने 13% होल्ड से प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत देने के साथ लंबित भर्ती प्रक्रियाओं और नियुक्तियों की समीक्षा करने की मांग की है। इसमें एमपीपीएससी, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य भर्ती संस्थाओं में प्रभावित पदों, चयन प्रक्रियाओं तथा लंबित नियुक्तियों का विवरण तैयार करने और अनावश्यक देरी रोकने के उपाय करने की बात कही गई है। मांगपत्र में आरक्षण से उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रवेश पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने, विशेषज्ञ समिति या सक्षम आयोग गठित करने, सभी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी तय करने और कार्ययोजना की नियमित समीक्षा करने की मांग भी शामिल है। महासभा ने मुख्यमंत्री कार्यालय या सक्षम विभाग के स्तर पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव दिया है, जो सुप्रीम कोर्ट में पैरवी, सर्वेक्षण, आयोग से परामर्श और प्रभावित भर्ती प्रक्रियाओं की निगरानी के बीच समन्वय स्थापित करे। महासभा के पदाधिकारी ने दोहराया कि संगठन को फिलहाल मुख्यमंत्री से आश्वासन मिला है, लेकिन वह इसके आधार पर लंबे समय तक इंतजार नहीं करेगा। 27% आरक्षण की बहाली और 13% होल्ड वाले अभ्यर्थियों को राहत देने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रस्तावित कार्यक्रमों के तहत आंदोलन आगे बढ़ाया जाएगा।



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