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ग्वालियर नगर निगम की सस्ते पेट्रोल-डीजल खरीदने की योजना पर सवाल उठ गए हैं। उत्तर प्रदेश के झांसी से तेल खरीदने के फैसले से करीब छह महीने में 6 करोड़ रुपए के नुकसान की बात सामने आई है। इस मामले के सामने आने के बाद झांसी से तेल की खरीदी बंद कर दी गई है। अब स्थानीय स्तर पर कम दरों पर डीजल खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार ने कहा है कि वे पूरे मामले की जानकारी जुटाकर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेंगी। नुकसान की सही रकम और वजहों की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी। नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (एमआईसी) में झांसी से पेट्रोल-डीजल खरीदने का प्रस्ताव पास किया गया था। उस समय दावा किया गया था कि इस व्यवस्था से निगम को प्रति लीटर 3.70 रुपए की बचत होगी। अनुमान के मुताबिक, हर महीने करीब 11.10 लाख रुपए और सालाना लगभग 1 करोड़ 33 लाख रुपए की बचत होनी थी। निगम के पास करीब 770 छोटे-बड़े वाहन हैं और हर महीने एक लाख लीटर से अधिक डीजल की खपत होती है। ऐसे में तेल की खरीदी में मामूली अंतर भी निगम के खर्च पर बड़ा असर डाल सकता है। बचत के दावे के बीच नुकसान के आरोप
इस मामले में आरोप है कि झांसी से तेल खरीदने के दौरान निगम को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध दरों की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ी। कुछ दावों में प्रति लीटर 34 रुपए तक अतिरिक्त भुगतान की बात कही जा रही है। इसी आधार पर करीब छह महीने की खरीदी में 6 करोड़ रुपए के नुकसान का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इस अंतर की गणना किस अवधि की दरों और कितनी मात्रा में खरीदे गए तेल के आधार पर की गई, यह स्पष्ट होना बाकी है।
युद्ध के कारण बढ़े दाम, फिर बदली व्यवस्था एमआईसी सदस्य अवधेश कौरव का कहना है कि झांसी से तेल खरीदने का निर्णय उस समय उपलब्ध दरों के आधार पर लिया गया था। बाद में युद्ध के हालात के कारण कीमतें बढ़ गईं और बल्क में खरीदी के चलते अपेक्षित बचत नहीं हो सकी। उनके मुताबिक, स्थिति की जानकारी मिलने के बाद आदेश वापस लेकर मध्यप्रदेश से तेल खरीदने का निर्णय किया गया।
वहीं, भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदारी तय करने और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। विवाद बढ़ने के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि खरीदी का निर्णय लेते समय कीमतों की तुलना, परिवहन खर्च और बदलती दरों का आकलन किस स्तर पर किया गया था।
महापौर बोलीं- जानकारी मिलने के बाद होगी कार्रवाई महापौर डॉ. शोभा सिंह सिकरवार ने कहा कि झांसी से डीजल खरीदने का प्रस्ताव एमआईसी में इस आधार पर पास हुआ था कि वहां तेल कम कीमत पर मिलेगा। उन्होंने बताया कि युद्ध के बाद कीमतों में बदलाव हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि युद्ध के हालात कुछ शांत होने के बाद भी झांसी से डीजल खरीदा गया। बाद में जब यह जानकारी सामने आई कि इस व्यवस्था में नुकसान हो रहा है, तो अधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी मांगी गई। महापौर के मुताबिक, पूरी जानकारी मिलने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब स्थानीय स्तर पर होगी खरीदी नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने बताया कि पहले जिस स्थान से डीजल खरीदा जा रहा था, उसकी तुलना में अब स्थानीय स्तर पर कम दर पर डीजल उपलब्ध है। इसी आधार पर एमआईसी को नया प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद स्थानीय स्तर से सस्ती दरों पर डीजल खरीदा जाएगा। अब पूरे मामले में खरीदी की दरों, परिवहन खर्च और भुगतान का रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ सकता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस योजना से सालाना 1.33 करोड़ रुपए की बचत का अनुमान लगाया गया था, उसमें नुकसान की बात कैसे आई? जांच में वास्तविक वित्तीय स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही तय हो सकेगा कि गलती निर्णय लेने की प्रक्रिया में हुई या बाद में बदली परिस्थितियों के आकलन में। साथ ही यह भी स्पष्ट करना होगा कि यदि निगम को आर्थिक नुकसान हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
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