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धार जिले में कम बारिश का असर अब खेतों में दिखने लगा है। भूजल स्तर गिरने से कई जगह बोरिंग में पानी कम हो गया है। कहीं रुक-रुककर पानी मिल रहा है तो कहीं बोरिंग बंद होने की कगार पर हैं। ऐसे में गेहूं और चने की रबी फसलों की सिंचाई को लेकर किसान चिंतित हैं। पिछले साल के मुकाबले आधी बारिश भी नहीं जिले में इस साल करीब 25.84 इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 51 इंच से अधिक था। बारिश में आई कमी से भूजल स्तर पर असर पड़ रहा है। खेतों में बोरिंग से पानी कम मिलने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। 20 बोरिंग कराने के निर्देश, काम अब तक अधूरा जल संकट को देखते हुए कलेक्टर राजीव रंजन मीना की अध्यक्षता में पिछले दिनों बैठक हुई थी। इसमें धार शहर में 20 बोरिंग कराने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए गए थे। हालांकि, अब तक इनका काम पूरा नहीं हुआ है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल स्तर गिरने से खेतों की बोरिंग से पानी की उपलब्धता लगातार कम हो रही है। गेहूं-चने की सिंचाई पर संकट रबी सीजन में गेहूं और चने की फसलों को समय पर पानी देना जरूरी होगा। लेकिन बोरिंग में पानी कम होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि जलस्तर में सुधार नहीं हुआ और पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में सिंचाई की समस्या और गंभीर हो सकती है।
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धार में पिछले साल से आधी बारिश:गेहूं-चने की फसल पर संकट, किसान चिंतित; 20 बोरिंग के निर्देश भी पूरे नहीं
