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बालाघाट में फिर मासूम की मौत, CMHO बोले-एस्पिरेशन से हुई:खैरटोला में 18 महीने के बच्चे की मौत, कांग्रेस ने 55 और प्रशासन ने 32 मौतें बताईं




बालाघाट के बैहर क्षेत्र में आदिवासी बच्चों की मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। मंगलवार को बिरसा क्षेत्र के खैरटोला चिखाली में 18 महीने के परदेशी मेरावी की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने मौत का कारण एस्पिरेशन बताया है। इसमें दूध या भोजन श्वांस नली में फंस जाता है। विभाग के अनुसार, यह संक्रमण से हुई मौत नहीं है। सीएमएचओ डॉ. शत्रुघन सिंह दाहिया ने बताया कि बच्चा स्वस्थ था और मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। पिछले 5 महीनों में आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की लगातार मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासन की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष संजय उईके ने घर-घर स्क्रीनिंग के बावजूद बच्चों की मौतें जारी रहने पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के मुताबिक, क्षेत्र में अब तक 55 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन का आंकड़ा 32 पर स्थिर है। पिछले दिनों भी सामने आए बच्चों की मौत के मामले आदिवासी क्षेत्र मातला में 22 अक्टूबर को बिसरू पिता जोहर परते (1 साल 4 महीने) की मौत का मामला सामने आया था। इसके बाद 25 अक्टूबर को आदिवासी घुम्मुर पंचायत के खैरटोला निवासी रेखा पिता मनतू (3) और सोनगुड्डा के सुंदरवाही निवासी शिवम उईके (2 महीने 23 दिन) की मौत की जानकारी सामने आई थी। अब परदेशी की मौत ने एक बार फिर क्षेत्र में बच्चों की सेहत और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पांच महीने में बच्चों की मौतों पर आंकड़ों का अंतर बैहर-बिरसा क्षेत्र में बच्चों की मौतों की संख्या को लेकर कांग्रेस और प्रशासन के आंकड़ों में अंतर है। कांग्रेस अध्यक्ष संजय उईके के मुताबिक, अब तक 55 बच्चों की मौत हुई है, जबकि प्रशासन 32 मौतें बता रहा है। कांग्रेस ने घर-घर स्क्रीनिंग के बावजूद मौतें जारी रहने पर सवाल उठाए हैं। ऐसे में मृत बच्चों की ग्रामवार सूची, मौत की तारीख, दर्ज कारण और जांच की स्थिति सामने आना जरूरी है। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि दोनों आंकड़ों में अंतर किन मामलों या कारणों से है। साथ ही, जिन बच्चों की मौत हुई है, उनकी बाल मृत्यु समीक्षा के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाने चाहिए। राहुल गांधी भी पहुंचे थे जगला, पीड़ित परिवारों से मिले थे 1 अक्टूबर को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बालाघाट के बैहर क्षेत्र के जगला गांव पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को खो चुके बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात कर उनकी स्थिति और स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली थी। इस दौरान आदिवासी क्षेत्रों में इलाज, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता का मुद्दा भी उठा। राहुल गांधी ने बच्चों की मौतों का मामला लोकसभा में उठाने की बात कही थी। उनके दौरे के बाद भी बच्चों की मौत के नए मामले सामने आए हैं। ऐसे में यह सवाल अहम है कि दौरे के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए और उनका असर कितना हुआ। अक्टूबर में लगातार सामने आए मौत के मामले अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में बैहर-बिरसा क्षेत्र के अलग-अलग गांवों से बच्चों की मौत के मामले सामने आए। 22 अक्टूबर को मातला में बिसरू पिता जोहर परते की मौत हुई। 25 अक्टूबर को खैरटोला की रेखा पिता मनतू और सुंदरवाही के शिवम उईके की मौत की जानकारी सामने आई। इसके बाद खैरटोला चिखाली में परदेशी मेरावी की मौत हुई। इन मामलों में बच्चों की उम्र, बीमारी के लक्षण, उपचार और अस्पताल पहुंचने की स्थिति की अलग-अलग जानकारी जुटाना जरूरी है। इससे पता चल सकेगा कि मौतों के पीछे कौन-कौन से कारण रहे और किन स्तरों पर इलाज या निगरानी में कमी की आशंका है। एस्पिरेशन बताया कारण, जांच के नतीजों का इंतजार खैरटोला चिखाली निवासी 18 महीने के परदेशी मेरावी की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने एस्पिरेशन को कारण बताया है। इसमें दूध या भोजन श्वांस नली में फंस जाता है। विभाग ने इसे संक्रमण से हुई मौत नहीं बताया है। सीएमएचओ डॉ. शत्रुघन सिंह दाहिया के मुताबिक, बच्चा स्वस्थ था और मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि मौत किन परिस्थितियों में हुई। हाल में सामने आए अन्य बच्चों की मौत के मामलों की समीक्षा से भी यह पता चल सकता है कि किन मामलों में संक्रमण, पोषण संबंधी समस्या, उपचार में देरी या दूसरे कारणों की भूमिका रही।



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