रीवा मिहिरसेन स्विमिंग पूल नहीं ले रहा कोई ठेके पर:4.5 करोड़ खर्च के बाद भी कोच की सुविधा नहीं, हर महीने 2 लाख का घाटा




रीवा शहर के सिविल लाइन स्थित मिहिरसेन स्विमिंग पूल को नए सिरे से तैयार करने में नगर निगम ने करीब 4.5 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, लेकिन अब इसके संचालन की जिम्मेदारी लेने के लिए कोई ठेकेदार तैयार नहीं है। नगर निगम ने पहली बार निविदा जारी की थी, लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद दूसरी बार निविदा प्रक्रिया शुरू की गई है। अब निगम को उम्मीद है कि इस बार कोई एजेंसी संचालन की जिम्मेदारी लेने आगे आएगी। करीब तीन दशक पहले तैयार किए गए मिहिरसेन तरणताल की हालत जर्जर हो गई थी। इसके बाद नगर निगम ने इसका जीर्णोद्धार कराया। यहां स्वीमिंग पूल के साथ डाइविंग पूल भी बनाया गया है। इस स्तर की सुविधा प्रदेश में भोपाल, इंदौर और ग्वालियर में उपलब्ध है। रीवा प्रदेश का चौथा शहर है, जहां ऐसी सुविधा विकसित की गई है। हालांकि, इसके बावजूद तरणताल नगर निगम के लिए आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बना हुआ है। हर महीने 3 लाख खर्च, आमदनी एक लाख से भी कम तरणताल के संचालन और देखरेख के लिए नगर निगम ने चार कर्मचारियों की तैनाती की है। ये कर्मचारी दो पालियों में काम करते हैं। इसके संचालन पर हर महीने करीब 3 लाख रुपए खर्च हो रहे हैं, जबकि आमदनी एक लाख रुपए भी नहीं है। इस तरह निगम को हर महीने 2 लाख रुपए से अधिक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी खर्च को देखते हुए नगर निगम अब तरणताल को ठेके पर देकर संचालन की जिम्मेदारी निजी एजेंसी को सौंपना चाहता है। तैराकी प्रशिक्षक तक उपलब्ध नहीं मिहिरसेन तरणताल में फिलहाल तैराकी सिखाने के लिए कोई प्रशिक्षित कोच उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति तब है, जब इस तरणताल को रीवा की तैराकी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था। वर्ष 1990 में रीवा के तैराकों ने नालों और तालाबों में प्रशिक्षण लेकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद खेल प्राधिकरण ने रीवा को मिहिरसेन तरणताल की सौगात दी थी। अर्जुन अवार्डी कैप्टन बजरंगी प्रसाद की परिकल्पना से जुड़े इस तरणताल को नगर निगम को सौंपा गया था, लेकिन यहां तैराकी प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत नहीं हो पाई। हाईटेक सुविधाएं, लेकिन उपयोग करने वाले कम जीर्णोद्धार के बाद 8 जून 2026 को तरणताल आम जनता के लिए दोबारा खोला गया था। यहां ऑटोमैटिक फिल्टर सिस्टम और सीसीटीवी से सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। रात में भी तैराकी की सुविधा उपलब्ध है, लेकिन इसका उपयोग करने वालों की संख्या बेहद कम है। महिलाओं के लिए शाम 5 से 6 बजे तक विशेष समय तय किया गया है। मासिक पंजीयन शुल्क 3 हजार रुपए है, जबकि एक दिन के लिए 100 रुपए देकर पंजीयन कराया जा सकता है। स्टेट चैंपियनशिप भी हुई, नियमित संचालन की चुनौती बरकरार तरणताल दोबारा शुरू होने के बाद यहां 54वीं मध्यप्रदेश स्टेट एक्वेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन भी किया गया। इसके बावजूद नियमित संचालन, तैराकी प्रशिक्षण और आय बढ़ाने की चुनौती बनी हुई है। नगर निगम ने करोड़ों रुपए खर्च कर इस सुविधा को विकसित किया, लेकिन फिलहाल इससे अपेक्षित आमदनी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद पूरी होती नजर नहीं आ रही है। अब दूसरी निविदा पर सबकी नजर है।



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