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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जमानती वारंट जारी होने के बावजूद स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल शुक्रवार को अदालत में उपस्थित नहीं हुए। पूर्व आदेश का पालन नहीं होने पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह का और समय दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा। जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को तय की है। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से बताया गया कि पिछले आदेश का पालन करने के लिए कुछ और समय की आवश्यकता है। इस पर कोर्ट ने दो सप्ताह की मोहलत दी, लेकिन स्पष्ट किया कि अब आदेश के पालन में और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। दो अधिकारियों को पेशी की चेतावनी हाईकोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन नहीं हुआ तो कोष एवं लेखा विभाग के कमिश्नर भास्कर लक्षाकर और छिंदवाड़ा के जिला शिक्षा अधिकारी गोपाल सिंह बघेल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना होगा। सेवानिवृत्त शिक्षिका ने लगाई याचिका मामला छिंदवाड़ा की सेवानिवृत्त सहायक शिक्षिका सुषमा गादरे की अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को आदेश पारित किया था, इसके बावजूद उनसे वेतन की वसूली की जा रही है। याचिका में वेतन वसूली की कार्रवाई को अवैधानिक बताते हुए कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किए जाने का मुद्दा उठाया गया है। हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. संजय गोयल सहित तीन अधिकारियों के खिलाफ पांच-पांच हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए थे। इसके बावजूद प्रमुख सचिव शुक्रवार को अदालत में उपस्थित नहीं हुए। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गौतम प्रसाद पैरवी कर रहे हैं।
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वारंट के बाद भी पेश नहीं हुए प्रमुख सचिव:हाईकोर्ट ने 2 सप्ताह का दिया समय,आदेश का पालन नहीं हुआ तो व्यक्तिगत उपास्थित होना पड़ेगा
