![]()
बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा में इंदौर के प्रहलाद पांडेय एक पोस्टर लेकर पहुंचे। इस पर लिखा था- ’30 हजार रुपए का बल्ब, 33 हजार रुपए लीटर फिनाइल… जवाब दो।’ पोस्टर देखकर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नाराजगी जताई। इसके बाद पुलिस प्रहलाद को थाने ले गई। नेताओं के कार्यक्रमों में सवाल उठाना और विरोध दर्ज कराना प्रहलाद के लिए नया नहीं है। कभी वे मंत्री के बंगले के बाहर प्रदर्शन करते हैं, तो कभी अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ 9 दिन तक अनशन पर बैठते हैं। पेशे से मोटिवेशनल स्पीकर प्रहलाद ऐसा क्यों करते हैं? क्या वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं और उनकी रोजी-रोटी कैसे चलती है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए भास्कर ने उनसे बात की। मोटिवेशनल स्पीकर हैं, लेकिन सड़कों पर उठाते हैं सवाल प्रहलाद पांडेय पेशे से बिहेवियरल ट्रेनर और लीडरशिप कोच हैं। वे निजी कंपनियों में मैनेजमेंट और लीडरशिप डेवलपमेंट की ट्रेनिंग देते हैं। यही उनकी आय का जरिया है। सार्वजनिक जीवन में वे इसे अपना ‘जन धर्म’ मानते हैं। प्रहलाद कहते हैं, ‘नागरिकों का काम सरकार से सवाल पूछना है। मैं तो लोकतंत्र बचाने के कार्यक्रम में लोकतंत्र का ही इस्तेमाल कर रहा था।’ उनका मानना है कि जिस तरह व्यक्ति परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाता है, उसी तरह उसे देश के प्रति नागरिक धर्म भी निभाना चाहिए। पत्नी संगीता भी साथ: ‘कामवाली से सवाल पूछती हूं तो सरकार से क्यों नहीं?’ उनकी पत्नी संगीता भी आंदोलनों में साथ रहती हैं। वे कहती हैं, हम टैक्स चुकाते हैं, इसलिए सवाल पूछने का हक है। मैं पति के हर आंदोलन में साथ रहती हूं, कैमरे के सामने भी और पीछे भी। व्यवस्था नहीं सुधरेगी तो हमारा समाज और बच्चे सुरक्षित नहीं रहेंगे। बच्चे कफ सिरप या दूषित पानी पीकर मर सकते हैं। यह लड़ाई सिर्फ अपने परिवार के लिए नहीं, दूसरों के लिए भी है। मैं अपनी कामवाली को 2 हजार रुपए देती हूं। वह बेवजह छुट्टी ले या काम न करे तो मैं उससे सवाल करती हूं। फिर नेताओं से सवाल पूछने में झिझक क्यों? एक घटना ने 16 साल पहले शुरू कराई सवाल पूछने की मुहिम प्रहलाद अपनी मुहिम की शुरुआत 16 साल पुरानी एक घटना से जोड़ते हैं। उनके मुताबिक, इंदौर से जबलपुर जाते समय ट्रेन के जनरल डिब्बे में काफी भीड़ थी। उनकी पत्नी गर्भवती थीं। इसी दौरान कुछ लोगों ने एक गरीब महिला को जबरन नीचे उतार दिया। प्रहलाद ने इसका विरोध किया तो उनकी पिटाई कर दी गई। वे बताते हैं कि इसके बाद परिवार को सतना छोड़कर वे 36 घंटे तक पुलिस से FIR दर्ज कराने की मांग करते रहे। FIR दर्ज होने के बाद ही वे वहां से हटे। प्रहलाद का दावा है कि इस घटना के बाद ट्रेन की व्यवस्था में बदलाव हुआ। वे कहते हैं कि तभी से उन्होंने सार्वजनिक मुद्दों पर सवाल उठाना शुरू किया। कैलाश विजयवर्गीय से गोलू शुक्ला तक, कई नेताओं से विवाद प्रहलाद के विरोध का तरीका लगभग तय है। वे व्यस्त चौराहों, नेताओं के घरों या बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों में पहुंचकर सवाल उठाते हैं और विरोध दर्ज कराते हैं। 1.जुलाई 2026: कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर प्रदर्शन नीट परीक्षा में कथित घोटाले को लेकर केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए प्रहलाद और संगीता ने नंदानगर स्थित कैलाश विजयवर्गीय के बंगले के बाहर प्रदर्शन किया था। प्रहलाद के मुताबिक, बिना अनुमति प्रदर्शन करने पर दोनों को जेल जाना पड़ा। 2.सितंबर 2026: विधायक गोलू शुक्ला से विवाद मरीमाता चौराहे पर अवैध होर्डिंग की रिकॉर्डिंग के दौरान प्रहलाद ने आरोप लगाया कि विधायक के समर्थकों ने उनकी पिटाई की और मोबाइल छीन लिया। विधायक गोलू शुक्ला ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि प्रहलाद उनका नाम लेकर प्रचार पाना चाहते हैं। अवैध होर्डिंग हटाने की मांग को लेकर प्रहलाद और संगीता रीगल चौराहे पर 9 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठे। नगर निगम और जिला प्रशासन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन खत्म किया। वार्ड के जलसंकट से दिल्ली तक उठाए सवाल प्रहलाद के विरोध का दायरा इंदौर से बाहर भी रहा है। वे बताते हैं कि अपने वार्ड में जलसंकट के दौरान पार्षद पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने पानी के टैंकर की चाबी निकाल ली थी। उनका दावा है कि 24 घंटे तक टैंकर खड़ा रखने के बाद सभी घरों में पानी देने पर सहमति बनी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वे दिल्ली भी गए थे। उनके मुताबिक, वहां पुलिस ने उन्हें दो दिन हिरासत में रखा। 2012 में उन्होंने ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ के बैनर तले भोपाल में कोयला घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया था। इस दौरान उन्हें चार दिन जेल में रहना पड़ा। विवादों और पुलिस कार्रवाई के बावजूद प्रहलाद पांडेय कहते हैं कि वे किसी भी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े हैं। मगर, अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं से जुड़े लोग उन्हें समर्थन देते हैं। वे सवाल उठाना बंद नहीं करेंगे। नेताओं के कार्यक्रमों और सार्वजनिक मंचों पर उनका विरोध इंदौर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ………………… यह खबर भी पढ़ें… विजयवर्गीय बोले-साला इतने जूते खाने के बाद भी आ गया: इंदौर में भाजपा की लोकतंत्र बचाओ पदयात्रा में समाजसेवी पर भड़के इंदौर में भाजपा की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा के दौरान मंत्री कैलाश विजयवर्गीय एक समाजसेवी को देखकर भड़क गए। समाजसेवी प्रहलाद पांडे पोस्टर लेकर पहुंचे थे। पोस्टर पर लिखा था- ‘30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल।’ विजयवर्गीय ने उन्हें अपशब्द कहे और पुलिस अधिकारी से गाड़ी में बैठाने को कहा। उन्होंने कहा- ‘साला इतने जूते खाने के बाद भी यहां पर आ गया।’ पूरी खबर पढ़ें…
publish_date
कैलाश के सामने पोस्टर लहराने वाले प्रहलाद पांडेय कौन?:16 साल पहले ट्रेन में पिटे,अन्ना आंदोलन में भी रहे शामिल; पेशे से मोटिवेशनल स्पीकर
