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राजधानी में जयस के प्रदर्शन के दौरान हंगामा:महिला कार्यकर्ता ने पुलिसकर्मी को थप्पड़ मारा, टीआई पर एफआईआर की मांग को लेकर जुटे थे वर्कर




टीआई रतन सिंह परिहार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर भोपाल के अंबेडकर मैदान में जुटे जयस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के दौरान हंगामा हो गया। सीएम हाउस की ओर बढ़ रहे कार्यकर्ताओं को पुलिस ने प्रकाश तरुण पुष्कर के सामने बैरिकेडिंग कर रोकने की कोशिश की तो विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान जयस की कार्यकर्ता बताई जा रही एक युवती ने पुलिस कांस्टेबल को थप्पड़ मार दिया। प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिस अधिकारियों और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ भी झूमाझटकी होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के रोकने पर कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और मौके पर काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रदर्शन के दौरान जयस के एक कार्यकर्ता ने कहा कि 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों के साथ जिस तरह की अभद्रता और गाली-गलौज की गई, उसके लिए संबंधित पुलिस अधिकारी पर एट्रोसिटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि निलंबन स्थायी कार्रवाई नहीं है और अधिकारी कुछ समय बाद बहाल हो सकते हैं। ‘आज हमें एफआईआर चाहिए’ जयस कार्यकर्ता ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि गृह विभाग मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास है और पूरे विभाग का नियंत्रण सरकार के हाथ में है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में लगातार आदिवासियों के साथ अत्याचार की घटनाएं सामने आ रही हैं और संगठन उनके अधिकारों के लिए आवाज उठा रहा है। कार्यकर्ता ने कहा, “हमको आज एफआईआर चाहिए उस व्यक्ति की, जिसने गाली-गलौज किया।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार ने अब तक निलंबन से आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की। ACP बोले: मामले में जांच जारी है जयस कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन पर एसीपी शैलेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एक अधिकारी ने अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था। मामला संज्ञान में आते ही संबंधित अधिकारी को निलंबित कर प्राथमिक जांच के आदेश दिए गए थे। चौहान ने कहा कि इस मामले में कई संगठन पुलिस अधिकारियों से मिले थे। उन्हें आश्वस्त किया गया था कि जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, “जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे और निष्कर्ष निकलेंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।” पुलिस से झड़प पर बोले- पहले प्रदर्शन समाप्त कराना प्राथमिकता जयस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच हुई झड़प को लेकर एसीपी ने कहा कि फिलहाल प्राथमिकता प्रदर्शन समाप्त कराने और गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने की है। उन्होंने कहा कि यदि झड़प या अन्य किसी घटनाक्रम के संबंध में तथ्य सामने आते हैं, तो उन्हें संज्ञान में लेकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ‘जय जोहार’ पर टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद पूरा मामला भोपाल के मिसरोद थाना प्रभारी रतन सिंह परिहार से जुड़ा है। मंगलवार, 13 अक्टूबर को आदिवासी छात्रों के प्रदर्शन के दौरान ‘जय जोहार’ बोलने पर अभद्र टिप्पणी और गाली-गलौज करने के आरोप टीआई पर लगे थे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद आदिवासी संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कार्रवाई की मांग की थी। मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों से चर्चा की थी। इसके बाद बुधवार, 14 अक्टूबर को टीआई रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया। पुलिस कमिश्नर ने उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए। एट्रोसिटी एक्ट में एफआईआर की मांग जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. हीरालाल अलावा ने टीआई के खिलाफ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम (एट्रोसिटी एक्ट) के तहत एफआईआर दर्ज करने और उनकी सेवा समाप्त करने की मांग की थी। संगठन ने पुलिस कमिश्नर को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग करने की बात कही थी। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी घटना को गंभीर बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा था कि टीआई को निलंबित कर जांच के आदेश दिए गए हैं। जांच में अन्य लोग भी दोषी पाए गए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।



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