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भोपाल में कहीं कचरा जल रहा…कहीं सड़ रहा मांस:सफाईकर्मियों की हड़ताल से बिगड़े हालात; डॉक्टर्स ने जताई चिंता, सुप्रीम कोर्ट जाएंगे पर्यावरणविद्




राजधानी भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल ने कचरा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी है। चौक बाजार में व्यापारी कचरे के ढेर में आग लगा रहे हैं, तो इतवारा-बुधवारा के मछली और मीट बाजार में सड़ते अवशेषों से बदबू फैल रही है। इससे एक तरफ कचरा जलने से हवा प्रदूषित होने का खतरा है, तो दूसरी तरफ सड़ते कचरे से संक्रमण और बीमारियों का जोखिम बढ़ रहा है। इस बदहाल स्थिति को अब सुप्रीम कोर्ट में भी उठाया जाएगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े मामले के याचिकाकर्ता पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने कहा है कि वे 17 नवंबर को होने वाली सुनवाई से पहले भोपाल के हालात की तस्वीरें और मीडिया रिपोर्ट कोर्ट में पेश करेंगे। उनका आरोप है कि कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी कलेक्टरों को सौंपने के बावजूद जमीन पर कोई सुधार नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे भोपाल के हालात पर्यावरणविद् सुभाष सी. पांडे ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद कलेक्टरों को जिम्मेदारी सौंपी गई थी, ताकि व्यवस्था में तेजी से सुधार हो सके। इसके बावजूद भोपाल में कचरा सड़कों पर जमा है और लोग उसे जला रहे हैं। उन्होंने कहा कि 17 नवंबर की सुनवाई से पहले वे इन हालात की तस्वीरें और मीडिया कवरेज कोर्ट में पेश करेंगे। साथ ही कलेक्टर की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाएंगे। चौक बाजार में कचरा जलने से हवा में घुल रहा धुआं पुराने शहर के चौक बाजार में सफाई नहीं होने से सड़कों और दुकानों के आसपास कचरे के ढेर लग गए हैं। परेशानी बढ़ने पर कुछ व्यापारियों ने कचरे में आग लगा दी। घरों की सफाई से निकले कचरे में प्लास्टिक और दूसरे पदार्थ भी शामिल हो सकते हैं। इनके जलने से निकलने वाला धुआं सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकता है। इससे आंखों में जलन, नाक-गले में एलर्जी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। पहले से अस्थमा और सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए यह स्थिति ज्यादा जोखिमभरी है। डॉक्टरों के मुताबिक, प्लास्टिक जलने से निकलने वाले जहरीले रसायन फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। लगातार या बार-बार ऐसे धुएं के संपर्क में आने से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। इसलिए कचरे को जलाने के बजाय उसका सुरक्षित निस्तारण जरूरी है। मछली-मांस के अवशेष सड़ने से संक्रमण का खतरा इतवारा और बुधवारा के मछली व मीट बाजार में स्थिति अलग तरह की है। यहां मछली, चिकन और मांस के अवशेषों वाला कचरा खुले में पड़ा है। इसके सड़ने से तेज दुर्गंध फैल रही है। पर्यावरण विशेषज्ञ के अनुसार, प्रोटीनयुक्त जैविक कचरा सड़ने पर दुर्गंध पैदा करता है। लंबे समय तक इसका निस्तारण नहीं होने पर आसपास का वातावरण अस्वच्छ बना रहता है। ऐसे कचरे पर मक्खियों और दूसरे कीटों के पनपने की आशंका भी रहती है, जो संक्रमण फैलाने का माध्यम बन सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे वातावरण में बैक्टीरियल संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। कचरे के संपर्क में आने, दूषित हाथों से भोजन करने और अस्वच्छ वातावरण के कारण स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं। ठंड, धूल और धुएं का एक साथ असर पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. पराग शर्मा के अनुसार, मौसम में बदलाव के साथ हवा में धूल और प्रदूषण पहले से मौजूद है। ऐसे में कचरा जलने का धुआं परेशानी बढ़ा सकता है। अस्थमा और सीओपीडी के मरीजों को एक्यूट अटैक आने की आशंका बढ़ सकती है। एलर्जी से पीड़ित लोगों को छींक, नाक बहने और सांस संबंधी दिक्कत हो सकती है। वहीं, डॉ. लोकेन्द्र दवे ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। कचरा जलाना और खुले में छोड़ना दोनों गलत पर्यावरण विशेषज्ञ सुभाष सी. पांडे ने कहा कि ठोस अपशिष्ट का रोजाना निस्तारण जरूरी है। कचरे को जलाना एयर एक्ट-1981 और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने कलेक्टर और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि हड़ताल के दौरान भी कचरा उठाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोगों को गंदगी और प्रदूषण से राहत मिल सके।



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