स्वामित्व योजना में ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज ग्रामीणों को मुफ्त रजिस्ट्री दे रही राज्य सरकार अब शेष बचे आबादी क्षेत्र वाले गांवों में सर्वे कराएगी।
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यह सर्वे ड्रोन के जरिये कराने के निर्देश कलेक्टरों को दिए गए हैं। इस सर्वे में नए हितग्राहियों की संख्या में दस लाख से अधिक लोगों के नाम बढ़ने का अनुमान है। साथ ही मुफ्त रजिस्ट्री का खर्च बजट में प्रस्तावित 3800 करोड़ रुपए से बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है।
ड्रोन सर्वे कर पात्र हितग्राहियों के अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर आयुक्त, भू-संसाधन प्रबंधन ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों को दिए निर्देश में कहा है कि स्वामित्व योजना के सर्वे से छूटे हुए आबादी क्षेत्रों की पहचान कर उनका विवरण विभाग को भेजा जाए।
आयुक्त कार्यालय की ओर से 6 नवंबर 2026 को जारी पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में पहले भी निर्देश दिए गए थे कि आबादी घोषित कर सर्वे की परिधि में शामिल किए गए क्षेत्रों के अलावा ऐसे अन्य क्षेत्रों की भी जांच की जाए, जिन्हें किसी कारणवश योजना में शामिल नहीं किया जा सका है, जबकि वहां पात्र हितग्राहियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जा सकते हैं।

दो श्रेणियों में होगी छूटे क्षेत्रों की पहचान
आयुक्त भू संसाधन और प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार मुख्य रूप से दो प्रकार के क्षेत्रों की पहचान की जाएगी।
ऐसे क्षेत्र जिन्हें पूर्व में आबादी घोषित किया जा चुका है, लेकिन किसी कारणवश स्वामित्व योजना के ड्रोन सर्वे में शामिल नहीं किया जा सका।
ऐसे क्षेत्र जहां आबादी घोषित होने के बाद पात्र हितग्राहियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में स्वामित्व योजना के तहत उनका सर्वे नहीं हुआ है।
तहसीलदारों को गांव-गांव जाकर जांच की जिम्मेदारी
आयुक्त ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने अनुभाग के अंतर्गत आने वाली सभी तहसीलों और गांवों का डिटेल परीक्षण कराएं। संबंधित तहसीलदारों के माध्यम से ग्रामवार और क्षेत्रवार जानकारी जुटाई जाए, ताकि कोई भी पात्र क्षेत्र स्वामित्व योजना के सर्वे और अधिकार अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया से वंचित न रहे।

प्रस्ताव के साथ अभिलेख भी देने होंगे
चिह्नित किए गए सभी क्षेत्रों का ग्रामवार एवं क्षेत्रवार विवरण आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर देना होगी। इसी आधार पर संबंधित क्षेत्रों को स्वामित्व योजना में शामिल करने और आवश्यकता के अनुसार ड्रोन सर्वे कराने की आगामी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि पिछले मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को बताया था कि योजना में रजिस्ट्री का आंकड़ा 50 लाख से बढ़कर 60 लाख तक पहुंच सकता है। सरकार मुफ्त रजिस्ट्री के लिए करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है।
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